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Cover of जोबन घिर आया…(काव्य-संग्रह)

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जोबन घिर आया…(काव्य-संग्रह)

by Rakhi Gupta

201834 pagesHindi

About the book

शब्द-विहीन... लेखनी काँप कर रह गयी और भाव शून्य में ही रहे ठहरे, भौतिकी बंधनो के लगे संवेदन मन पर कठोर पहरे, अशान्त मन, बोझिल तन अन्त: में छिड़े अनेको अंतर्दव्ंद, भावनाओं का वेग ही चला है क्षीण, और रह गए पृष्ठ शब्द-विहीन -राखीगुप्ता

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Paperback9789388008556₹195Amazon

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