Paperback₹250
Buy on AmazonKi Shaam Ghir Ayi Hai (Hindi Poems)
by Indu Gupta
201654 pages
About the book
उम्रकेइसपड़ावतकआतेजिंदगीकेकईरंगघुलतेदेखे।हरशामकोएकनएरंगमें, नएआयाममेंमहसूसकिया।कभीरोमांटिक,कभीउदासीओढ़े, कभीवजूदकेसाथखेलते, कभीयादोंकेकिरचेखुरचतेहुए।
जरूरीनहींकीशामकोजिसनिग़ाहसेमेनेदेखाहैवैसेहीशामकाआनाढलनाआपभीमहसूसकरें।कैंसरकीसर्जरीसेउबारकरजीनेकीशामबहुतमायनेलेकरआनेलगी, येशामसिर्फशामहीतोनहींथी, जिंदगीकीशामथीजोरोजघिरघिरकरआतीहैऔरचलीजातीहै।
हरशामएकदस्तखतहैकिताबकेउनलम्होंकेसफहोंपरजहाँकुछआंसूगिरकरपन्नोकीस्याहीबेरंगकरगए, कहींनएप्यारकीस्याहीउन्हेंरंगीनकरगयीकिसीअंचलपरपड़ेसितारोंसी।
बहुतगहरेतकदिलमें उतरतीशामकिसीकेआनेकीप्रतीक्षाकरतीरहतीहै… शायदअनजाना, काल्पनिकसमयकादोस्त!
Editions
| Format | ISBN | Price | |
|---|---|---|---|
| Paperback | 9789352073122 | ₹250 | Amazon |
Subjects
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