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Cover of वो धुआँ था ( काव्य संग्रह)

Paperback₹295

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वो धुआँ था ( काव्य संग्रह)

by Sanskrity Sinha

2019100 pagesHindi

About the book

आपने कभी डायरी लिखी या लिखने की कोशिश की है? डायरी में अक्सर हम सच लिखते-लिखते कुछ आधा-अधूरा, पूरा सच छिपा ही लेते हैं, इस डर से कि कोई पढ़ न ले। लेकिन कविता लिखते वक्त बहुत हैरत होती है कि हम केवल सच ही रचते हैं। कविता लिखने से यह एहसास होता है कि कविता से सच क्या होगा?अपने ऐसे ही कई एहसासों और वास्तविकताओं को संस्कृति सिन्हाने "वो धुआँ था"संग्रह में पिरोया है। जैसे ठंडे होते राख से उठता धुआँ ख़ुद को हवाओं पर न्योछावर कर देता है, जैसे वह पीछे अपनी एक निशान छोड़ फिर अदृश्य हो जाता है, वैसे ही ब्रह्मांड में वापस विलीन होने के लिए, हम हमारी यात्रा पर अग्र हैं। आशा है, "वो धुआँ था" में आपको भी अपने सफ़र की कुछ झलकदेखने को मिलें।आपने कभी डायरी लिखी या लिखने की कोशिश की है? डायरी में अक्सर हम सच लिखते-लिखते कुछ आधा-अधूरा, पूरा सच छिपा ही लेते हैं, इस डर से कि कोई पढ़ न ले। लेकिन कविता लिखते वक्त बहुत हैरत होती है कि हम केवल सच ही रचते हैं। कविता लिखने से यह एहसास होता है कि कविता से सच क्या होगा?अपने ऐसे ही कई एहसासों और वास्तविकताओं को संस्कृति सिन्हाने "वो धुआँ था"संग्रह में पिरोया है। जैसे ठंडे होते राख से उठता धुआँ ख़ुद को हवाओं पर न्योछावर कर देता है, जैसे वह पीछे अपनी एक निशान छोड़ फिर अदृश्य हो जाता है, वैसे ही ब्रह्मांड में वापस विलीन होने के लिए, हम हमारी यात्रा पर अग्र हैं। आशा है, "वो धुआँ था" में आपको भी अपने सफ़र की कुछ झलकदेखने को मिलें।

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Paperback9789389110029₹295

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